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📝 नामांतरण / दाखिल-खारिज क्या होता है?

भूमि स्वामित्व परिवर्तन की पूरी प्रक्रिया — UP Lekhpal परीक्षा 2026

Exam Alert: नामांतरण से UP Lekhpal परीक्षा में 3-4 प्रश्न हर बार आते हैं। प्रक्रिया और time limit जरूर याद करें।

📌 नामांतरण (Mutation) क्या है?

नामांतरण = भूमि के स्वामित्व परिवर्तन को सरकारी खतौनी में दर्ज करना।

जब किसी भूमि का मालिक बदलता है तो नए मालिक का नाम सरकारी record (खतौनी) में update करना होता है।
इस प्रक्रिया को नामांतरण, दाखिल-खारिज या Mutation कहते हैं।

UP Revenue Code 2006 की धारा 40 के अंतर्गत यह प्रक्रिया होती है।

📌 नामांतरण कब होता है?

कारणविवरणजरूरी documents
विरासत (Inheritance)मालिक की मृत्यु पर वारिस के नाममृत्यु प्रमाण-पत्र, वारिस प्रमाण-पत्र
क्रय-विक्रय (Sale)जमीन खरीदने पर खरीदार के नामरजिस्ट्री दस्तावेज (Sale Deed)
बंटवारा (Partition)परिवार में जमीन बाँटने परबंटवारानामा (Partition Deed)
उपहार (Gift)दान में मिली जमीनGift Deed / दान-पत्र
न्यायालय आदेशCourt order के आधार परCourt decree की copy

📌 नामांतरण की प्रक्रिया — Step by Step

1
आवेदन: नए मालिक द्वारा तहसील में आवेदन-पत्र और सभी दस्तावेज जमा किए जाते हैं।
2
सार्वजनिक सूचना: तहसील द्वारा आवेदन की सार्वजनिक घोषणा की जाती है — किसी को आपत्ति हो तो बता सके।
3
लेखपाल मौका जाँच: लेखपाल मौके पर जाकर भूमि की पहचान, कब्जा और किसी विवाद की जाँच करता है। जाँच रिपोर्ट तहसील में जमा करता है।
4
आपत्ति अवधि: 15 दिन की आपत्ति अवधि होती है। इस दौरान कोई भी अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है।
5
SDM/तहसीलदार का आदेश: सुनवाई के बाद SDM या तहसीलदार नामांतरण का आदेश देते हैं।
6
खतौनी update: लेखपाल नए मालिक का नाम खतौनी में दर्ज करता है।
⏱ समय सीमा: आवेदन से लेकर खतौनी update होने तक अधिकतम 45 दिन की समय-सीमा है।

📌 लेखपाल की भूमिका नामांतरण में

नामांतरण में लेखपाल की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है:

मौका जाँच — भूमि पर जाकर physical verification
जाँच रिपोर्ट — तहसीलदार को लिखित रिपोर्ट देना
विवाद की पहचान — कोई dispute है तो report करना
खतौनी update — आदेश मिलने पर नाम दर्ज करना

लेखपाल की report के बिना नामांतरण नहीं हो सकता।
परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्न:
• नामांतरण का दूसरा नाम क्या है? → दाखिल-खारिज / Mutation
• नामांतरण UP Revenue Code की कौन सी धारा में है? → धारा 40
• नामांतरण की अधिकतम समय सीमा? → 45 दिन
• मृत्यु पर नामांतरण के लिए कौन सा document? → मृत्यु प्रमाण-पत्र + वारिस प्रमाण-पत्र
• नामांतरण में लेखपाल क्या करता है? → मौका जाँच और रिपोर्ट

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

नामांतरण क्या होता है?
नामांतरण (Namanantaran) या दाखिल-खारिज वह प्रक्रिया है जिसमें भूमि के स्वामित्व में परिवर्तन होने पर नए मालिक का नाम सरकारी खतौनी में दर्ज किया जाता है।
नामांतरण कब जरूरी होता है?
जब जमीन का मालिक बदले: (1) मृत्यु पर विरासत, (2) खरीद-फरोख्त (Sale-Purchase), (3) परिवार में बंटवारा (Partition), (4) उपहार (Gift Deed), (5) न्यायालय का आदेश।
नामांतरण में कितना समय लगता है?
UP में नामांतरण की अधिकतम समय सीमा 45 दिन है। लेखपाल की जाँच रिपोर्ट के बाद तहसीलदार/SDM आदेश देते हैं।
नामांतरण के लिए कौन से documents चाहिए?
मृत्यु पर: मृत्यु प्रमाण-पत्र, वारिस प्रमाण-पत्र। बिक्री पर: रजिस्ट्री दस्तावेज। बंटवारे पर: बंटवारानामा। सभी मामलों में: आवेदन-पत्र, पहचान प्रमाण।
दाखिल-खारिज ऑनलाइन कैसे देखें?
UP Bhulekh पोर्टल (upbhulekh.gov.in) या Vaad.up.gov.in पर अपना case status देख सकते हैं। तहसील में भी जाकर पता कर सकते हैं।