🌾 Girdawari 2026

खरीफ व रबी गिरदावरी — UP Lekhpal Guide, फसल कोड और Process

खरीफ बुवाई
जून-जुलाई 2026
गिरदावरी अवधि
1 अगस्त — 30 सितंबर 2026
मुख्य फसल
धान, मक्का, बाजरा, ज्वार
📋 खरीफ गिरदावरी — Step-by-Step
Step 1
खसरा लिस्ट तैयार करें — अपने ग्राम के सभी खसरे (गाटे) की सूची upbhulekh.gov.in से download करें। प्रत्येक गाटे पर फसल दर्ज करनी होगी।
Step 2
क्षेत्र निरीक्षण — प्रत्येक खेत में जाकर खड़ी फसल देखें। किसान से बात करें। परती (Waste) जमीन नोट करें। बाढ़/सूखे से नुकसान अलग से दर्ज।
Step 3
फसल कोड भरें — नीचे दिए कोड से प्रत्येक गाटे में फसल का कोड दर्ज करें। एक गाटे में एक से अधिक फसल हो सकती है — Mixed Cropping में दोनों कोड।
Step 4
Online Upload / Register भरें — UP में अब Digital Girdawari system है। Mobile App या Kisan Portal पर upload करें। Manual register भी भरें — Tahsildar को submit।
Step 5
Crop Damage / Blight दर्ज करें — यदि प्राकृतिक आपदा से फसल नष्ट हुई हो तो 'आपदा' column में percentage दर्ज करें। यह PM Fasal Bima के लिए ज़रूरी।
🌾 खरीफ फसल कोड — UP 2026
01धान (Paddy)
03मक्का (Maize)
05ज्वार (Jowar)
06बाजरा (Bajra)
08उड़द (Urad)
09मूंग (Moong)
11अरहर (Arhar)
16मूंगफली
20गन्ना (Sugarcane)
23कपास (Cotton)
31सब्ज़ी (Vegetable)
99परती (Fallow)
रबी बुवाई
अक्टूबर-नवंबर 2026
गिरदावरी अवधि
1 दिसंबर 2026 — 31 जनवरी 2027
मुख्य फसल
गेहूँ, सरसों, आलू, चना
📋 रबी गिरदावरी — Step-by-Step
Step 1
पिछली गिरदावरी check करें — खरीफ गिरदावरी की entries देखें। जो खेत परती था वह रबी में किसान ने बोया हो तो update करें।
Step 2
दिसंबर में निरीक्षण — गेहूँ की फसल दिसंबर में खड़ी मिलती है। सरसों नवंबर-दिसंबर में। आलू की बुवाई अक्टूबर-नवंबर में होती है।
Step 3
सिंचाई source नोट करें — नलकूप, नहर, तालाब, वर्षा। रबी में सिंचाई का महत्व अधिक। MSP के लिए सिंचित/असिंचित क्षेत्र अलग रखें।
Step 4
Rabi Girdawari online submit — Digital Girdawari App से upload करें। Tahsildar Karyalay में hardcopy submit करें। Deadline: 31 जनवरी।
❄️ रबी फसल कोड — UP 2026
02गेहूँ (Wheat)
07जौ (Barley)
10चना (Gram)
12मसूर (Lentil)
14मटर (Pea)
17सरसों (Mustard)
18अलसी (Linseed)
26आलू (Potato)
27प्याज (Onion)
31सब्ज़ी (Vegetable)
20गन्ना (Sugarcane)
99परती (Fallow)
जायद बुवाई
फरवरी-मार्च 2027
गिरदावरी अवधि
1 अप्रैल — 31 मई 2027
मुख्य फसल
तरबूज, खरबूजा, मूंग, मक्का
📋 जायद गिरदावरी — Step-by-Step
Step 1
अप्रैल में क्षेत्र निरीक्षण करें — जायद फसलें फरवरी-मार्च में बोई जाती हैं और अप्रैल तक खड़ी हो जाती हैं। 1 अप्रैल से निरीक्षण शुरू करें। नदी किनारे के रेतीले क्षेत्र (Diara भूमि) पर विशेष ध्यान दें जहाँ तरबूज-खरबूजा की खेती होती है।
Step 2
जायद फसल कोड दर्ज करें — तरबूज (32), खरबूजा (33), खीरा/ककड़ी (34), भिंडी (35), लौकी (36), तोरई (37), करेला (38), ग्रीष्म मक्का (03), मूंग (09), उड़द (08) के कोड नोट कर लें। एक गाटे में मिश्रित सब्ज़ियाँ हों तो कोड 31 (सब्ज़ी) दर्ज करें।
Step 3
Diara / नदी कछार भूमि दर्ज करें — UP में गंगा, यमुना, सरयू आदि नदियों के किनारे की कछार भूमि पर जायद में तरबूज-खरबूजा बड़े पैमाने पर होता है। ऐसी भूमि का सही खसरा नं., काश्तकार और फसल कोड दर्ज करें। अस्थायी पट्टे पर ली गई कछार भूमि हो तो पट्टाधारक का नाम नोट करें।
Step 4
PM Fasal Bima — जायद अधिसूचना देखें — कुछ जिलों में PM Fasal Bima Yojana जायद सीजन के लिए भी लागू होती है। जिले की अधिसूचित फसलें देखें। तरबूज/सब्ज़ी नुकसान के लिए 'आपदा प्रतिशत' column सही भरें — यह claim के लिए आधार बनता है।
Step 5
31 मई तक Online Submit करें — Digital Girdawari App या UP Revenue Portal पर जायद entries upload करें। Manual register में भी दर्ज करें और Tahsildar Karyalay को hardcopy submit करें। परती रहे खेतों पर कोड 99 (परती) दर्ज करना न भूलें।
🌿 जायद फसल कोड — UP 2026-27
32तरबूज (Watermelon)
33खरबूजा (Muskmelon)
34खीरा/ककड़ी (Cucumber)
35भिंडी (Okra)
36लौकी (Bottle Gourd)
37तोरई/तुरई (Ridge Gourd)
38करेला (Bitter Gourd)
03मक्का-ग्रीष्म (Summer Maize)
09मूंग (Green Gram)
08उड़द (Black Gram)
31सब्ज़ी (Vegetable)
99परती (Fallow)
ℹ️ जायद गिरदावरी — विशेष जानकारी
विषय जानकारी
जायद (Zaid) क्या है? खरीफ और रबी के बीच की गर्मी की फसल ऋतु। फरवरी-मार्च में बुवाई, अप्रैल-जून में कटाई। यह तीसरी ऋतु है जो मुख्यतः नदी कछार और सिंचित खेतों में होती है।
महत्व क्यों? जायद गिरदावरी सही होने पर किसान को MSP, फसल बीमा और बैंक KCC Loan में सहायता मिलती है। Revenue Record में तीनों ऋतुओं का data होने से भूमि उपयोग सटीक रहता है।
Diara / कछार भूमि नियम नदी की कछार (Diara) भूमि अस्थायी होती है। यहाँ काश्त करने वाले का नाम, फसल और क्षेत्रफल जायद गिरदावरी में दर्ज करना अनिवार्य है। यदि खसरा सरकारी है तो वैध पट्टा देखें।
अल्पावधि पट्टा भूमि कुछ किसान जायद के लिए दूसरे की भूमि अल्पकालिक पट्टे पर लेते हैं। ऐसे में असली काश्तकार (पट्टाधारक) का नाम गिरदावरी में दर्ज करें, न कि भूमिस्वामी का। UP Revenue Code Section 33 देखें।
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